संपूर्ण चालीसावर परत जाश्लोक 13 / ४३
चौपाई 11
चौपाई 11 भावार्थ व आध्यात्मिक विवेचन
लाय संजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
laaya smjeevana lakhana jiyaaye।
shreeraghubeera harashi ura laaye॥
सरळ भावार्थ
या भाषेत अनुवाद उपलब्ध नाही. मूळ अवधी पाठ उपलब्ध आहे.