संपूर्ण चालीसावर परत जाश्लोक 14 / ४३
चौपाई 12
चौपाई 12 भावार्थ व आध्यात्मिक विवेचन
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
raghupati keenhee bahuta bada़aaee।
tuma mama priya bharatahi sama bhaaee॥
सरळ भावार्थ
या भाषेत अनुवाद उपलब्ध नाही. मूळ अवधी पाठ उपलब्ध आहे.