संपूर्ण चालीसावर परत जाश्लोक 17 / ४३
चौपाई 15
चौपाई 15 भावार्थ व आध्यात्मिक विवेचन
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥
jama kubera digapaala jahaan te।
kabi kobida kahi sake kahaan te॥
सरळ भावार्थ
या भाषेत अनुवाद उपलब्ध नाही. मूळ अवधी पाठ उपलब्ध आहे.