चौपाई 29

चौपाई 29 भावार्थ व आध्यात्मिक विवेचन

चारों जुग परताप तुम्हारा।

है परसिद्ध जगत उजियारा॥

chaarom juga parataapa tumhaaraa।

hai parasiddha jagata ujiyaaraa॥

सरळ भावार्थ

या भाषेत अनुवाद उपलब्ध नाही. मूळ अवधी पाठ उपलब्ध आहे.