संपूर्ण चालीसावर परत जाश्लोक 31 / ४३
चौपाई 29
चौपाई 29 भावार्थ व आध्यात्मिक विवेचन
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥
chaarom juga parataapa tumhaaraa।
hai parasiddha jagata ujiyaaraa॥
सरळ भावार्थ
या भाषेत अनुवाद उपलब्ध नाही. मूळ अवधी पाठ उपलब्ध आहे.