संपूर्ण चालीसावर परत जाश्लोक 41 / ४३
चौपाई 39
चौपाई 39 भावार्थ व आध्यात्मिक विवेचन
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
jo yaha padha़ai hanumaana chaaleesaa।
hoya siddhi saakhee gaureesaa॥
सरळ भावार्थ
या भाषेत अनुवाद उपलब्ध नाही. मूळ अवधी पाठ उपलब्ध आहे.