संपूर्ण चालीसावर परत जाश्लोक 42 / ४३
चौपाई 40
चौपाई 40 भावार्थ व आध्यात्मिक विवेचन
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
tulaseedaasa sadaa hari cheraa।
keejai naatha hridaya mahn deraa॥
सरळ भावार्थ
या भाषेत अनुवाद उपलब्ध नाही. मूळ अवधी पाठ उपलब्ध आहे.