चौपाई 4

चौपाई 4 भावार्थ व आध्यात्मिक विवेचन

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कानन कुंडल कुंचित केसा॥

kmchana barana biraaja subesaa।

kaanana kumdala kumchita kesaa॥

सरळ भावार्थ

या भाषेत अनुवाद उपलब्ध नाही. मूळ अवधी पाठ उपलब्ध आहे.