संपूर्ण चालीसावर परत जाश्लोक 7 / ४३
चौपाई 5
चौपाई 5 भावार्थ व आध्यात्मिक विवेचन
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
haatha bajra au dhvajaa biraajai।
kaandhe moonja janeoo saajai॥
सरळ भावार्थ
या भाषेत अनुवाद उपलब्ध नाही. मूळ अवधी पाठ उपलब्ध आहे.