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चौपाई 10
चौपाई 10 भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे॥
bheema roopa dhari asura smhaare।
raamachmdra ke kaaja smvaare॥
सरल भावार्थ
विशाल रूप धरकर असुरों का नाश किया और प्रभु श्री राम के सभी संकल्पों को पूरा किया।