चौपाई 35

चौपाई 35 भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या

और देवता चित्त न धरई।

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥

aura devataa chitta na dharaee।

hanumata sei sarba sukha karaee॥

सरल भावार्थ

केवल हनुमान जी की सेवा करने से ही जीवन के सभी सुख प्राप्त हो जाते हैं।