चौपाई 12

चौपाई 12 भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

raghupati keenhee bahuta bada़aaee।

tuma mama priya bharatahi sama bhaaee॥

सरल भावार्थ

भगवान राम ने हनुमान जी को अपने सबसे प्रिय भाई भरत के समान आदर व प्रेम दिया।