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चौपाई 18
चौपाई 18 भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
juga sahasra jojana para bhaanoo।
leelyo taahi madhura phala jaanoo॥
सरल भावार्थ
बाल्यावस्था में हजारों योजन दूर स्थित सूर्य को मीठा फल समझकर आपने मुख में रख लिया था।
पौराणिक एवं भक्ति संदर्भ
हनुमान जी की बाल-लीला का स्मरण, जो उनके अदम्य साहस और शक्ति को दर्शाता है।