चौपाई 7

चौपाई 7 भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या

बिद्यावान गुनी अति चातुर।

राम काज करिबे को आतुर॥

bidyaavaana gunee ati chaatura।

raama kaaja karibe ko aatura॥

सरल भावार्थ

विद्यावान, गुणवान और चतुर हनुमान जी सदैव राम-काज करने को आतुर रहते हैं।