चौपाई 4

चौपाई 4 भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कानन कुंडल कुंचित केसा॥

kmchana barana biraaja subesaa।

kaanana kumdala kumchita kesaa॥

सरल भावार्थ

सोने जैसे रंग, मनोहर रूप, कानों में कुंडल और घुंघराले केश वाले हनुमान जी अत्यंत सुंदर दिखते हैं।