चौपाई 5

चौपाई 5 भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।

काँधे मूँज जनेऊ साजै॥

haatha bajra au dhvajaa biraajai।

kaandhe moonja janeoo saajai॥

सरल भावार्थ

हाथ में गदा/वज्र व ध्वज तथा कंधे पर पवित्र यज्ञोपवीत धारण किए हुए हैं।