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प्रारंभिक दोहा २
प्रारंभिक दोहा २ भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौ पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार॥
buddhiheena tanu jaanike sumirau pavana-kumaara।
bala budhi bidyaa dehu mohim harahu kalesa bikaara॥
सरल भावार्थ
हे पवनपुत्र हनुमान जी, मुझे बल, बुद्धि और ज्ञान दीजिए और मेरे सभी दुखों और दुर्गुणों को दूर कीजिए।
शब्दार्थ
| अवधी शब्द | सरल अर्थ |
|---|---|
| बुद्धिहीन | ज्ञान व बुद्धि से रहित |
| तनु जानिके | स्वयं को जानकर |
| सुमिरौ | स्मरण करता हूँ |
| पवन-कुमार | पवनपुत्र श्री हनुमान |
| कलेस बिकार | शारीरिक व मानसिक कष्ट और विकार |